वो स्त्री है......
एक काम से लौटकर वो दूसरे काम पर लौट जाती है।एक काम से मिली दिन भर की थकान को दूसरे काम से हटा वो ,जाती है ।
एक काम में कुछ अलग रूप लिए वो ,दूसरे काम में खुद को तलाशती रहती है ।
एक काम पर सभी को सजाती- संवारती दूसरे काम में वो, खुद को खोजती रहती है।
एक काम में उचाईयों पर अपना मुकाम हासिल कर दूसरे काम में धरा पर अपना अस्तित्व वो, खोजती रहती है।
एक काम पर मिली मुस्कान को दूसरे काम पर जिम्मेदारी के बोझ तले दबा वो, जाती है ।
एक काम पर झेले दर्द को दूसरे काम पर खुशियाँ बाँट भूल सी वो, जाती है ।
एक काम की दूसरे काम से तराजू पर नापतोल को सही बैठा वो ,जाती है ।
एक काम में महसूस किए उतार-चढ़ाव की दूसरे काम में झलक तक भी वो ,ना दिखलाती है ।
एक काम के चौबीस घंटो का दूसरे काम के चौबीस घंटो से तालमेल बिठा वो, जाती है।
एक काम से मिली थकावट को दूसरे काम में चुस्ती फुर्ती में बदल वो ,जाती है।
जानते हो किस नाम से पहचानी है वो ,जाती?
सही पहचाना
वो स्त्री है ,जो एक काम से लौटकर दूसरे काम पर फ़िर से लौट जाती है।
वो स्त्री है ,जो एक काम से लौटकर दूसरे काम पर फ़िर से लौट जाती है।
DEEPSHREE

Bahut sundar
ReplyDeleteShukriya 🌺
DeleteGood observation. Very true.
ReplyDeleteThanks 🌺
DeleteGreat 👍
ReplyDeleteFantastic
ReplyDeleteThanks😊
DeleteVery well said👏👏
ReplyDeleteThanks for ur appreciation 😊
DeleteWell written 👏 👌
ReplyDelete😊🙏🙏
DeleteGreatlines👍
ReplyDelete🙏🌺🙏
Deleteवाह! कितने दिन लगे कविता बनाने में? भगवान् आपको ओर ऊंचाईयों पर ले जाए! खुश रहो,🙌🏻
ReplyDeleteएहसास स्पष्ट हो, तो उसे शब्दों में पिरोने में वक़त नहीं लगता।🌺
Deleteअभिनंदन 🌺😊🌺
Superb ❤️❤️
ReplyDelete❤
DeleteKhubsurat ahsaas ,jise bakhubi tumne shabdo me piroya h👍👏👌💗
ReplyDeleteप्रोत्साहन के लिए आपका धन्यवाद🌺
Deleteस्त्री के अस्तित्व को दर्शाती बहुत बेहतरीन रचना,❤️
ReplyDeleteशुक्रिया ❤
DeleteBhut hi sunder
ReplyDeleteDhanyawad🌺
DeleteExcellent
ReplyDeleteThanks for ur appreciation 🌺
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