आज जाना.....
आज जाना, मौत भी कुछ कम खूबसूरत नहीं होती...... ना जाने क्यूँ लोग जीए जा रहे हैं ? तरसाया ज़िंदगी ने, इक हाथ के लिए........ पर अब, कन्धे संग कंधे दिए जा रहे हैं।। दो कदम साथ चलने को न थे राज़ी.......... पर अब ,संग काफ़िले के चलते जा रहे हैं । दुआ को तोह्फ़े तक में देने में की कंजूसी.......... पर अब, महँगे फूलों की बारिश किए जा रहे हैं। ज़िंदगी भर साथ बैठने के लिये तरसाया हमें........ पर अब ,वक़्त को निकाल साथ बैठे जा रहे हैं। ...