पिता 💖
पिता का किया कोई, तौल नहीं सकता| जो वो बेचता है उसका, मोल कोई लगा नहीं सकता|| कर दुनिया जताती है इक अंश, भर भी| जो वो करता है उससे वाकिफ़, वो खुद को भी नहीं कराता || बेच वो खुद के सपने, सपने अपनों के सजाता है| पूरे होने पर उनके, बस दूर बैठा वो मुस्काता है || श्रेय उसे कोई खुल कर देता नहीं बात ये, बड़ी अनोखी है | माँ - माँ हर कोई करता , पिता को जपता कोई - कोई है || जो बिन जताए खुशियाँ दे वो, ईश कहलाए | पिता भी तो वो ही करता तो, ईश से कम क्यूँ वो आँका जाए? गर हो उनकी छत्र- छाया में तो, मस्तक पर तेज महसूस करो | अच्छे कर्मो के लेप लगा , शीश पिता का सुशोभित करो || ...