नारी: उलझनों में भी उजाला


                                  

नारी आज की सुलझाती है सब कुछ,
पर खुद में उलझ जाती है ।

सवालों के जवाब सभी के
खोजकर लाने वाली,
अक्सर, खुद से किए सवालों में
उलझ जाती है।

मुस्कुराने को
जीने का अंदाज़ बताने वाली,
तकिये में कभी-कभी
मुँह दबाकर चुप-चुप रोती है।

सपनों को सभी के  नए आयाम तक पहुँचाने वाली,
अक्सर, अपनी उड़ान के
पंखों को उलझी सी दिशा देती है।

पहचान को अपने दम पर बनाने वाली,
कभी-कभी अपने ही किसी कोने में
अपनी अनकही पहचान खोजती है।

सुकून के हर पल को परिभाषित करने वाली,
अपने व्यक्तित्व की परिभाषा के लिए
शब्द खोजती है।

लिखा जो कुछ भी
सच वो भी है,
पर वो भी जो
लिखने जा रही हूँ।

नारी
वो है....
जो अविश्वास को ,विश्वास में बदलने की ताकत रखती है।

वो है....
जो उड़ते पक्षी के अंदाज़ को देखकर ,उसकी मंज़िल का पता लगा लेती है।

वो है....
जो बार-बार हारकर भी ,जीत की नई मिसाल बना देती है।

वो है....
जो जीवन की हर मुश्किल को किस्मत के सहारे नहीं,
मेहनत के सहारे पार लगाती है।

वो है....
जो दिल में छुपे गुबार को ,ज्वालामुखी बनाकर
परेशानियों को भेदती है।

बात यही है कि
वो, वो है
जो बिना कुछ कहे अपने, एहसास से ही इतिहास लिख देती है।

                                                                  DEEPSHREE

 

Comments

  1. Beautiful lines 😍😍

    ReplyDelete
    Replies
    1. Beautiful poem.... Har pankti apne jeewan ki kahani si lagti hai

      Delete
  2. Very beautiful and motivational lines

    ReplyDelete
    Replies
    1. Beautiful lines for ladies

      Delete
    2. Happy to know that u liked it. Thanks

      Delete
  3. Beautiful ❤️❤️

    ReplyDelete
  4. अति सराहनीय कविता मैम

    ReplyDelete
  5. अति सराहनीय कविता मैम

    ReplyDelete
  6. Very thoughtful an deep💕

    ReplyDelete
  7. Ek nari ki antrik duniya ko shabdo me vyakt kar diya aapne .

    ReplyDelete

Post a Comment

भाव के अनुरूप पढ़कर प्रोत्साहित करें l

Popular posts from this blog

बेटी का अनकहा दर्द.......

चुभन