कैसे?
होगा सब कुछ ठीक ये मानू कैसे? जिन्दगी को झूठ के आईने से देखूँ कैसे? फल्सफ़ा जिन्दगी का बदला कईं बार मैने है कौन सा बेहतर ,यह जानू कैसे ? अच्छा करने पर अच्छा होगा सुना सिर्फ ,देखा नहीं अच्छाई पर बुराई को जीतते देख अपनाउँ कैसे ? जिंदगी में बनाए उसूल वक्त पर बिखरते देखें नए उसूल बनाकर दिल को बहलाऊँ कैसे? छोटे-छोटे पलों में खुशियों को किया महसूस दिखावे की दुनिया में उन पलों को फिर से पाऊँ कैसे? अपनेपन,लगाव के लालच में किया बहुत कुछ गलत हो सच्चाई से वाकिफ इच्छा फिर से जगाऊँ कैसे? बेपरवाह हुई एक बार तो बदलना नामुमकिन कशमकश पर यह है कि ,बेपरवाह खुद को बनाऊँ मैं कैसे? ...