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Showing posts from October, 2020

कैसे?

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                                                         होगा सब कुछ ठीक ये मानू कैसे? जिन्दगी को झूठ  के आईने से देखूँ  कैसे? फल्सफ़ा जिन्दगी का बदला कईं बार मैने है कौन सा बेहतर  ,यह जानू कैसे ? अच्छा करने पर अच्छा होगा सुना सिर्फ ,देखा नहीं  अच्छाई पर बुराई को जीतते देख अपनाउँ कैसे ? जिंदगी में बनाए उसूल वक्त पर बिखरते देखें नए उसूल बनाकर दिल को बहलाऊँ कैसे? छोटे-छोटे पलों में खुशियों को किया महसूस दिखावे की दुनिया में उन पलों को फिर से पाऊँ  कैसे? अपनेपन,लगाव के लालच में किया बहुत कुछ गलत हो सच्चाई से वाकिफ इच्छा फिर से  जगाऊँ  कैसे? बेपरवाह हुई एक बार तो बदलना नामुमकिन कशमकश पर यह है कि ,बेपरवाह खुद को बनाऊँ मैं कैसे?                                                      ...

दर्द की गूँज

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                                            नन्ही सी परी थी वो। नाज़ों से पाली गई थी वो।। वो थी माँ -बाप का मान सम्मान। थी वो ,अपने भाई का अभिमान।। दुख को जिसने कभी ना किया महसूस । आज बैठी अपने आप को समेटे हुए मायूस।। आँगन जिसकी बोली से चहकता था जहाँ | दर्द की गूँज रही चीखें ,अब वहाँ ।| ना गलती उसकी,ना कोई उसका कुसूर।। फिर भी होता पल-पल अस्तित्व उसका चकनाचूर । । नजरों को गर्व से मिलाती थी वह सबसे।| बेवजह उन्हीं नजरों को छुपाती है वो सभी से। दर्द के निशान जो उसके ज़हन पर छपते हैं।। नासूर बन, पल-पल उसकी आत्मा को डसते हैं। किसी की काली सोच को वह भुगतती है ।। पड़े जिस्म पर धब्बों को हटाने को ,कुरेददी है | खुद से करती नफरत, प्यार खुद से करने वाली।। खो जाती अंधेरों में रोशनी को भी दिशा दिखाने वाले वाली|| शक्ति में वो कम नहीं, भंडार है उसमे धैर्य  का। ठान ले गर सोच में कुछ तो उसे, कर गुज़रने का।। पर भूलो  नहीं कि ...... मान  को उसके जब ठेस पहुँचती है। फूल सी सौम्य दिखने वाल...

बेवजह .....

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                                                                      बेमतलब की होड़ में लगे हैं लोग, बेवजह । खुद को महान दूसरे को नीचा दिखाने का मकसद लिए बैठे हैं लोग ,बेवजह। मतलबी हो इंसानियत को भूलते जा रहे हैं लोग ,बेवजह। दिल की खूबसूरती को दुतकारने में लगे हैं लोग, बेवजह। बाहरी रंग-रूप को अहमियत दे धोखा पाल रहे हैं लोग, बेवजह। पैसा- शौहरत को अपनों से भी बड़ा मान बैठे हैं लोग , बेवजह। अपना छोड़, दूसरों को मिटाने में लगे हैं लोग, बेवजह। खुशी को कैसे दूसरों से करें दूर इस तिगड़म में लगे हैं लोग, बेवजह । दिखावे से भरी चमक-दमक को कीमती मानने लगे हैं लोग, बेवजह। खोखली दुनिया में अपनों को गवा परायो को अपना मान बैठे हैं लोग, बेवजह। अपने मन की बदसूरती को ,दूसरों के मन की खूबसूरती से छिपाया जा रहे हैं लोग बेवजह।                               ...