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Showing posts from May, 2020

ख़ास ....❤️

                                                                                 ख़ास की एहमियत उससे ही जुड़ा जाने । जो जोड़े ,उसकी ख़ुशियों के ताने-बाने ।। पल-पल जो उस ख़ास परछाई को ओढ़े। दिल पर-भर को भी उससे नाता ना तोड़े।। ख़ास की गलती भी ख़ास । गुनाह भी शायद उस ख़ास का ख़ास ।। ख़ास ही बदले शख़्सियत। पा लेने पर शायद एहमियत।। उम्मीदों को पूरा करने की उम्मीद उसी से । आकांक्षाओं को समझ ,फिर पा लेने की उम्मीद उसी से।। बाँधकर भी शायद ,बाँधना ना चाहें। पर दिशा हर एक उसकी अपनी ओर ही आए ,यह चाहें।। अपने ख़ास से दूरी ।  लगे ज़िंदगी की सबसे बड़ी मजबूरी।। ख़ास  के लिए चाहें करना कुछ ख़ास । उसकी खुशी से जुड़ी है, ज़िंदगी की आस।। अपना दर्द गवारा ,उसकी खुशी के आगे । पिरोना चाहे ,सिर्फ़ खुशी के मोती में धागे।।                     ...

वो हैं.......

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वो है मेरे अस्तित्व का आधार। वो हैं  जो भरें मेरी खुशियों का भंडार। वो हैं जो सोचें हमेशा मेरे भले का। वो है जो देते संदेश सदैव आगे बढ़ने का। वो हैं अपनी ज़रूरतों को मेरी ख़वाहिशों के लिए भूलने वाले। वो हैं अपनी पसंद - नापसंद को मेरे मुताबिक़ बदलने वाले । वो हैं तपती धूप में मेरे लिए छाँव को तलाशने वाले।                                                                                  वो हैं बरसात में अपनेपन की  छतरी लिए दिखने वाले ।                                                                                 वो हैं  मेरे संग गुड्डे-गुड़िया ,घर -घर का ...

दर्द इतना ही देना ख़ुदा.....

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दर्द इतना ही देना ऐ ख़ुदा, की उसकी मौजूदगी सारे राज़ न खोल दे। कौन अपना ,कौन पराया , सारी बात मुँह पर ही न बोल दे ।।  दर्द इतना ही देना ऐ ख़ुदा,  की दिल में बनी उम्मीद चकनाचूर न हो ।  मतलबी हो जाऊँ, यह सोचने पर दिल मजबूर न हो। दर्द इतना ही देना ऐ ख़ुदा, की जो अपने मे ही सीमट जाए। न छलके आँखों से ,न शब्द ही  उसे कह पाएँ।।  दर्द इतना ही देना ऐ ख़ुदा,  जो अपने ख़ास को मुझसे जोड़ दे।   झूठ का अस्तित्व मिटा, सच से नाता जोड़ दे ।                                                                                                                 DEEPSHREE

खुशी इतनी तो देना ख़ुदा .....

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खुशी इतनी तो देना ख़ुदा की, पल के भी ,हर पल को जीयूँ। हर दुःख से यह पूछ सकूँ ,आया  तू यहाँ है क्यूँ ?                                                              खुशी इतनी तो देना ख़ुदा की,                                                              ज़िंदगी से करूँ मैं  ऐसे ही प्यार।                                                    जैसे माँ लुटाती है ,अपने अंश पर दुलार। खुशी इतनी तो देना ख़ुदा की दस्तक दे - दे वो दर पर मेरे थक जाए। आता तो उसे सिर्फ़ आना, जाने का राह वह ढूँढ ना पाए।।         ...

आख़िर मैं ही क्यूँ ?

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आख़िर मैं ही क्यूँ? सपना सोच कर सोचूँ ,सोच कर देखूँ  और देखकर पूरा करूँ   आख़िर मैं ही क्यूँ ? ऐसा तुम्हारा लिए नहीं, तुम यूँ ही करो ,ऐसा करूँ आख़िर  मैं  ही क्यूँ ? दुख को क़िस्मत मान ,ख़ुशी से सह लूँ आख़िर  मैं  ही क्यूँ ? सारे रिश्ते अपनाकर,अपना अस्तित्व ही खो दूँ आख़िर  मैं  ही क्यूँ? लफ़्ज़ एक केवल फ़र्ज़ ,को ही ज़िंदगी की अपनी किताब में रख लूँ   आख़िर  मैं  ही क्यूँ? ख़ुशी की अपनी खुद की परिभाषा को औरों के लिए बदलूँ  आख़िर  मैं  ही क्यूँ? जो पूछे नहीं मेरी भावनाओं,मेरे मन को उनकी सोच के मुताबिक़ हमसफ़र उनका बन चलूँ आख़िर  मैं  ही क्यूँ? दोस्ती,प्यार के मायनों को बेमतलब क़ायदों के लिए बदलाव ले आऊँ , आख़िर  मैं  ही क्यूँ? जन्म मुझे माँ ने ,कष्ट सह दिया तो व्यर्थ उसे करूँ आख़िर   मैं  ही क्यूँ? बोलने से पहले,शब्दों को संस्कारों की कसौटी पर तोलूँ, आख़िर  मैं  ही क्यूँ? अपनी भावनाओं को दुनिया की बेमानी सोच से डर ,ना कह...