लड़की होना, इतना भी आसान नहीं
लड़की होना, इतना भी आसान नहीं.. हमें जो समझना पड़ता है उसे, सोचना तक आसान नहीं.. दरवाज़े की कुण्डी पर नजर हमारी ,नींद से ज़्यादा होती है | क्यूँकी दरवाज़े की कुण्डी ही शायद हमें ,सुकून की नींद दे पाती है || खुद पर रखे हौंसले पर से यकीन कभी - कभी उठ जाता है | जब इक अंजान सी नजर का खौफ़, नजर में हमारी टिक जाता है | लाड़, प्यार यकीन से पाला जाता है हमें | पर माँ - बाप की आँखों पर छाए, घबराहट और चिंता के बादल सहमा जाते हैं हमें || बेटा - बेटा बोल, माँ बाप मजबूत बनाते हैं हमें | पर कुरीतियों के दलदल में कभी -कभी वो धंसा हुआ सा पाते हैं हमें || आजाद पंछी बन , बेझिझक ज़िंदगी को जीना चाहती हूँ मैं| पर खौफ़ के साए में अजीब सी घुटन में घिर जाती हूँ मैं|| चीत्कार, दुत्कार, अत्याचार क्यूँ सहना...