Posts

Showing posts from November, 2020

अन्धकार इक अभिशाप का (बाल विवाह)

Image
                                                सुना मैंने कविता और कथाओं में । धर्मों में अपने और अपनी परंपराओं में ।। मैं ही कन्या ,मैं ही लाडली। मैंने ही हर रिश्ते में खुशियाँ  डाली।। पर कैसा अजब यह नियम बनाया। मुझ कोमल फूल को ,पल-पल  जिसने दबाया ।। जीवन का अर्थ, अभी मुझे मालूम नहीं। रिश्तों  का भाव ,अभी मुझे मालूम नहीं।। मेरे नाजुक कंधों पर शादी का बोझ क्यों डाल दिया। लगा ऐसा, जैसे खुले परिंदे को  खूँटे से किसी ने बांध दिया।। छोटी सी है उम्र मेरी ,कोमल से है हाव-भाव। कृत एक गुनाह जैसा, खेल गया मुझ पर दुख का दावं । कहना चाहूँ  कुछ मैं तुमसे, मुझसे तुम मुँह   ना मोड़ो। मैं हूँ नन्ही कली सी अभी भी ,यूँ ना मेरे सपनों को तोड़ो । । क्यों है जल्दी ब्याह की  मेरी ,लिख -पढ़  तो मुझे जाने दो। ममता प्रेम की मैं हूँ मूर्ति ,पूरी तो   गढ़  जाने दो।। तितली  मैं  बगिया की तुम्हारी ,कुछ सैर सपाटा तो करने दो। ...

पर्व प्रकाश का.....

Image
पर्व प्रकाश का दे हटा,दुख का अंधेरा । प्रकाशित करे जीवन को ,सुख का नवीन सवेरा।। बीत  गया वर्ष ले गया,संग अपने कुछ खुशियाँ  हमारी। जिसे था अपना माना,वो ही  यादों  पर दिख रहा भारी।। प्रज्वलता दीपों  की खुशियाँ  दे जाए । सोच में सोची,सोच से भी प्रभु झोली  भर जाए ।। पर्व ये उल्लास और  अपनेपन का है। छटेगा इसी की मौजूदगी  में क्यूंकि, अन्धकार बस यह पल- भर का है।। उम्मीदों का दीपक, करो आज भी प्रज्वलित । पूरी होगी  उम्मीदें जिनकी चुका चुके  हम कीमत।। प्रार्थना है ईश से ,हो कुशल मंगल अब सब। विपत्ति  हो नष्ट सुख -समृद्धि से परिपूर्ण हो सब।।                                                                                                                   ...