मुकद्दर
हार को जीत में बदल देता है मुकद्दर । दर्द को खुशियों से मिला जाता है मुकद्दर। टूटी हुई उम्मीद को विश्वास की डोर ,थमा जाता है मुकद्दर। अनकहे जज्बात को कहने की हिम्मत, दे जाता है मुकद्दर। डूब रहे हौसले को रवाँ सा कर जाता है मुकद्दर। ख्वाब में भी देखे हुए ख्वाब को,पूरा करा जाता है मुकद्दर। कर ले कोशिश कितनी भी कोई रोकने की हो लिखा तो, मंजिल तक पहुँचाता है मुकद्दर। DEEPSHREE