वो स्त्री है......

                                                       


 एक  काम से लौटकर वो दूसरे काम पर लौट जाती है।

एक काम से मिली दिन भर की थकान को दूसरे काम से हटा वो ,जाती है ।
एक काम में कुछ अलग रूप लिए  वो ,दूसरे काम में खुद को तलाशती  रहती है ।
एक काम पर सभी को सजाती- संवारती  दूसरे काम में वो, खुद को खोजती रहती है।
एक काम में  उचाईयों  पर  अपना मुकाम हासिल कर  दूसरे काम में धरा पर अपना अस्तित्व वो, खोजती रहती है।
एक काम पर मिली मुस्कान को दूसरे काम पर जिम्मेदारी के बोझ तले दबा वोजाती है ।
एक काम पर झेले दर्द को दूसरे काम पर खुशियाँ  बाँट भूल सी वोजाती है ।
एक काम की दूसरे काम से तराजू पर नापतोल को सही बैठा वो ,जाती है ।
एक काम में महसूस किए उतार-चढ़ाव की दूसरे काम में झलक तक भी वो ,ना दिखलाती  है ।
एक काम के चौबीस  घंटो का दूसरे काम के चौबीस घंटो  से तालमेल बिठा वो, जाती है।
एक काम से मिली थकावट को दूसरे काम में चुस्ती फुर्ती में बदल वो ,जाती है।

जानते हो किस नाम से पहचानी है वो ,जाती?
सही पहचाना
वो स्त्री है ,जो एक काम से लौटकर दूसरे काम पर फ़िर से  लौट जाती है।




                                                                                                                    DEEPSHREE

Comments

  1. Bahut sundar

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  2. Good observation. Very true.

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  3. Well written 👏 👌

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  4. Greatlines👍

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  5. पूनम शर्मा19 May 2022 at 21:42

    वाह! कितने दिन लगे कविता बनाने में? भगवान् आपको ओर ऊंचाईयों पर ले जाए! खुश रहो,🙌🏻

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    1. एहसास स्पष्ट हो, तो उसे शब्दों में पिरोने में वक़त नहीं लगता।🌺
      अभिनंदन 🌺😊🌺

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  6. Superb ❤️❤️

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  7. Khubsurat ahsaas ,jise bakhubi tumne shabdo me piroya h👍👏👌💗

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    1. प्रोत्साहन के लिए आपका धन्यवाद🌺

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  8. स्त्री के अस्तित्व को दर्शाती बहुत बेहतरीन रचना,❤️

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  9. Bhut hi sunder

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