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Showing posts from March, 2025

एक लड़की जो.....

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                                                           एक लड़की जो ,    ख्वाहिशों के पंख लिए पैदा हुई.. एक लड़की जो ,    जागते - सोते बस सपनों की दुनिया में हिचकोले लेकर बढ़ी हुई.. एक लड़की जो ,    सही- गलत ,ज़रूरी - गैरज़रूरी के पैमाने को तोलते हुए बढ़ी हुई.. एक लड़की जो , चाहत को मन में दबाए, सकुचाए खुद में समेटे हुए बढ़ी हुई.. एक लड़की जो,  जीवन के नन्हें -नन्हें पलों को मन में समेटकर, मुस्कुराते हुए बढ़ी हुई.. एक लड़की जो ,    ज़िंदगी के संकरे, अनचाहे मोड़ों को पार करते - करते बढ़ी हुई.. एक लड़की जो ,    लोगों की आँखों में कटाक्ष से भरे सवालों के जबाव को टटोलते हुए बढ़ी हुई.. एक लड़की जो ,    खुद से जुड़े लोगों की खुशियों को ,अपनी खुशियों से भी कीमती मान बढ़ी हुई.. वो, वो ही लड़की, हाँ वो ही लड़की अपनी ज़िद को ,ज़िंदगी मान मुकाम को हास...

छुरी और चम्मच

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                                                      छुरी और चम्मच में कौन है खास? जब इस बहस  का हुआ आगाज तो चम्मच बोल ये, इतराया  खाने को मैंनें ,ज़बान तक पहुँचाया.. ☺️ बात सुन चम्मच की, छुरी हुई बेकरार  बोल उठी वो इतराकर  मैं ही  हूँ जो ,कर सकती है हर फल - सब्ज़ी पर वार.. 😁 दोनों की सुन बात काँटा मैदान में कूदा  सोच रहा था, हल देने का है बस उसमें ही गुदा.. 🤣🤣🤣 काँटे ने कह इक बात, द्वन्द सारा निपटाया.. बोला फैला कर मुझ जैसे बाहें, फल सब्ज़ी को ज़बान तक तुम  पहुँचाओ  कद काठ मेरी जैसी लेकर, तुम भी मुझ जैसे इतराओ.. छुरी और चम्मच दोनों के  गुणों को है मैंनें खुद में समेटा..  चावल, सब्ज़ी या हो नूडल सभी को अपने हाथों में है मैंनें लपेटा.. 🤣🤣🤣🤣😂😂😂                                           ...

मसरूफ़

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                                                             मसरूफ़ हर कोई आज खुद में है.. दुनिया में हर कोई घिरा कहीं -न कहीं खुद में है.. मसरूफियत का आलम आज कुछ इस कदर है छाया  पूछने पर भी न कोई  इसका राज़  न जान पाया  मसरूफ़ कोई अपनी दुनिया में  मसरूफ़ कोई किसी दूसरे की दुनिया में  है कोई  मसरूफ़ इस सोच में कि, मसरूफ़ मैं  हो जाऊँ कैसे? और कोई है  मसरूफ़  इस दुनिया में  बताने के लिए  कि.. मसरूफ़ है वो, ये बात दुनिया को पता लगे कैसे? 😂😂😂😂 मसरूफियत का आलम छाया है जग में सभी पर कुछ इस तरह  कि..  खाली बैठा इंसान भी खालीपन को महसूस करने की  मसरूफियत में है..                                                         ...

इश्क मेरे लिए....

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                                                                     💓इश्क  मेरे लिए वो है जिसमें मेरे लिए डूबा वो ...  चाँद की चाँदनी को मेरे सामने फीका माने | हवा के हर रुख में मेरी खुशबू ,को  महसूस करे | मेरी साँसों को अपनी साँसों, में घुला सा जाने | ख्वाहिशों को मेरी, अपनी ज़िद सा जो समझे | सपनों की दुनिया में जाने से पहले जो ,मुझे देखना  चाहिए | नींद के झोंकों में भी अपनी पलकों पर जो मुझे झुलाए | मुझमें छिपे  बच्चे को जो, लाड़ - लगाव से पाले | ख़ूबसूरती को मेरी, दिल के पैमाने पर जो गहराई से महसूस करे | मुझे अपनी आँखों की पलक और रोशनी सा ज़रूरी माने | मेरे हाथ को पकड़, उनकी लकीरों को गहराई तक छू जाए | सर्दी की रातों में जो बाहों में समेट मुझे, खुद में समेट ले | बारिश की बूँदों को मेरे चेहरे पर गिरा देख, मासूमियत से अपनी थिरकते हुए हाथों से हटाए | नज़र में मेरे  थमे, अनकहे एहसास को...