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Showing posts from September, 2021

वजूद

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                                             वजूद अपना खुद बनाना पड़ता है। हौसले को बुलंद बनाना पड़ता है। चाहते हो गर मुकाम करना हासिल अनोखा तो शिला को इरादों से ही हटाना पड़ता है।। वजूद अपना खुद बनाना पड़ता है । दिन को रात, रात को दिल से मिलाना पड़ता है ।। चाहते हो गर दुनिया दे,मिसाल तुम्हारी। तो हवा में भी चिराग जलाना पड़ता है ।। वजूद अपना खुद बनाना पड़ता है। इच्छाओं को दाव  पर लगाना पड़ता है । चाहते हो गर नए दौर की शुरुआत करना तो नरम से शीश पर, काँटों  का ताज उठाना पड़ता है।। वजूद अपना खुद बनाना पड़ता है।                                                                                                       ...

तो कैसे मुमकिन है ?

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               आसमान को क्या किसी ने बुलंदी से रूबरू करवाया?  हवा का रुख,क्या कोई है बदल पाया?  नदी के प्रवाह को राह, क्या कोई है दिखा पाया?  रोशनी से सूरज को क्या कोई है मिलवा पाया ?  धरती के बोझ, का कोई अंदाजा भी है लगा पाया ?   चाँद  को शीतलता से, क्या है किसी ने मिलवाया?  बारिश की  बूँदों  को क्या किसी ने लगा  सीढ़ी , धरती तक पहुँचाया?  बीज को ,पौधा बनने का क्या किसी ने ज्ञान है करवाया?  धड़कन का दिल की गहराइयों से,क्या किसी ने परिचय है करवाया ?  तो कैसे मुमकिन है? माँ के हृदय में पनपती ममता को तोल पाना।                                                                                                             ...