बेटी का अनकहा दर्द.......
माँ मैं तुझे ,छोड़कर जाऊँ कैसे? दिल की धड़कन को मैं ,समझाऊँ कैसे? जिसे तू ,मेरा हाथ भरोसे से थमा रही है उस पर ,तुझ जैसा यकीन महसूस कर जाऊँगी कैसे? जैसे अपनी कोख और आँचल में रखा महफ़ूज़ तूने उस यकीन की उम्मीद किसी अनजान से ,कर पाऊँगी कैसे? गरमाहट तूने ,अपनेपन की देकर सुकून से सम्भाला मुझे नफरत और लालच की अग्नि से मैं खुद को बचाऊँगी कैसे? अपनी ज़िद को पापा और तुमसे, अपनी चादर के मुताबिक कहा मैंने. किसी की लालच भरी इच्छा को, पापा और तुमसे कह पाऊँगी कैसे ? तुमनें कभी आवाज़ ऊँची कर डाँटा तक नहीं मुझे किसी कहने को अपने, की मार को मैं सह पाऊँगी कैसे? छोटी -छोटी बात की शिकायत तुमसे करने वाली मैं ज़िंदगी के खुद से रूठने की बात तुझे, बता पाऊँगी कैसे? मुझे जलने से डर लगता है मा...