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हमारा भविष्य उज्जवल है ...

  इक वक़्त था .. जब, तन ढकना इक जरूरत थी, तो लोग इसके लिए प्रयास करते थे। प्रयास आज भी करते हैं पर अब ,तन को न ढकने का। और हम कहते हैं, कि   हमारा भविष्य उज्जवल है | जब, बुजुर्ग घर की शान माने जाते थे । अब तो लोग अपनी शान की खातिर वृद्धा आश्रम की राह उन्हीं बुजुर्गों को दिखाते हैं। और हम कहते हैं कि  हमारा भविष्य उज्जवल है | जब, बच्चों में बचपन झलकता था, पर आज  बच्चों में बड़प्पन और बड़ों में बचपन झलकने लगा है। और हम कहते हैं कि  हमारा भविष्य उज्जवल है | जब, चूल्हे पर बनी पहली रोटी ईश का रूप माने जाने वाली गाय, को दिया करते थे। पर अब बचा हुआ खाना, प्लास्टिक में डाल उसे दे आते हैं । और हम कहते हैं कि  हमारा भविष्य उज्जवल है | जब, बेजान खिलौने समय बिताने के लिए  इस्तेमाल होते थे | पर आज हम लोगों के दिल को ही खिलौना  मान बैठे हैं । और हम कहते हैं कि  हमारा भविष्य उज्जवल है | जब, ज़ुबाँ की कीमत होती थी|  पर अब ज़ुबाँ के अलावा हर चीज़, कीमती नज़र आती है। और हम कहते हैं कि  हमारा भविष्य उज्जवल है |             ...