तो समझेगा कौन?

 




                                               

  जन्मदात्री ही न समझी तो समझेगा कौन?

व्यथा दर्द में लिपटी बेटी की वो ही ना समझी तो, समझेगा कौन ?

अंश से वंश की दिशा दिखाने वाली न समझी तो, समझेगा कौन?

सही -गलत का ज्ञान कराने वाली न समझी तो, समझेगा कौन?

सुख संताप का भेद बताने वाली न समझी तो,समझेगा कौन?

कहना जिसे सबसे आसान हो वो ही,ना समझी तो समझेगा कौन ?

जीवन से मिलवाने वाली ही न समझी तो ,समझेगा कौन?

दर्द को आँखों में देख भी न समझी वो तो ,समझेगा कौन ?

अपने खून से उसे बनाने वाली न समझी तो, समझेगा कौन?

जो खुद समझौते को झेल कर भी न समझी तो ,समझेगा कौन ?

आँसुओं को उससे दूर रखने वाली ही न समझी तो ,समझेगा कौन?

दूर  ऊँची उड़ान का सपना दिखाने वाली ही न समझी तो, समझेगा कौन ?

उम्मीद को दिशा देने वाली ही न समझी तो, समझेगा कौन?

 जन्म देने के दर्द को महसूस करने वाली ही न समझी तो, समझेगा ?
                                                                          
घुट- घुट कर जिंदगी जीना मुश्किल है ये वो ही न समझी तो, समझेगा कौन?
                                                                                                                              DEEPSHREE

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