तो समझेगा कौन?
व्यथा दर्द में लिपटी बेटी की वो ही ना समझी तो, समझेगा कौन ?
अंश से वंश की दिशा दिखाने वाली न समझी तो, समझेगा कौन?
सही -गलत का ज्ञान कराने वाली न समझी तो, समझेगा कौन?
सुख संताप का भेद बताने वाली न समझी तो,समझेगा कौन?
कहना जिसे सबसे आसान हो वो ही,ना समझी तो समझेगा कौन ?
जीवन से मिलवाने वाली ही न समझी तो ,समझेगा कौन?
दर्द को आँखों में देख भी न समझी वो तो ,समझेगा कौन ?
अपने खून से उसे बनाने वाली न समझी तो, समझेगा कौन?
जो खुद समझौते को झेल कर भी न समझी तो ,समझेगा कौन ?
आँसुओं को उससे दूर रखने वाली ही न समझी तो ,समझेगा कौन?
दूर ऊँची उड़ान का सपना दिखाने वाली ही न समझी तो, समझेगा कौन ?
उम्मीद को दिशा देने वाली ही न समझी तो, समझेगा कौन?
जन्म देने के दर्द को महसूस करने वाली ही न समझी तो, समझेगा ?
घुट- घुट कर जिंदगी जीना मुश्किल है ये वो ही न समझी तो, समझेगा कौन?
DEEPSHREE

Inspirational 👏
ReplyDeleteThanks 💐
DeleteBeautiful emotions
DeleteThanks for appreciation 💐
Deleteबहुत सुंदर 💞
ReplyDeleteशुक्रिया 💐
DeleteThanks 💐
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