मेरा मास्क मेरी पहचान


 मेरा मास्क मेरी पहचान।

अब ना रही मैं इससे, अनजान ।।

मास्क मेरा बना रक्षक।

जीवाणु ,विषाणु का भक्षक।।

पहन इसे मैं, रहती सुरक्षित ।

पल भर को भी, ना होती विचलित।।

संगी साथी बना यह मेरा ।

पल भी ,साथ न छोड़े मेरा।।

द्वारपाल सा मुख पर बैठे।

राजा बन  मुख पर ही ऐंठे ।।

सभी को एक जैसा बतलाया।

रंग -रूप का भेद मिटाया।।

कर न पाए  जो ज्ञानी-विज्ञानी ।

नन्हे से मास्क ने, वो कर दिखलाया।
                                                                                                  DEEPSHREE

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