मुश्किल सब कुछ है, मुश्किल कुछ भी नहीं.....
मुश्किल सब कुछ है, मुश्किल कुछ भी नहीं
ये सोच का फ़र्क़ है, और कुछ भी नहीं।
जो डर को सच मान ले, वो रुक जाता है वहीं,
जो ख़ुद पर यक़ीन कर ले—रास्ता बनाता है वही।
रात जितनी भी काली हो, सुबह को रोक नहीं सकती,
हार की हर कहानी, जीत को टोक नहीं सकती।
घुटनों पर बैठा इंसान भी उड़ सकता है एक दिन,
बस.......
अपनी ही नज़रों में छोटा होना,छोड़ दे जो हर दिन ।
हर कदम पर सवाल, हर मोड़ पर इम्तिहान,
मन कहता है थक गए, दिल कहता है—अभी कहाँ।
जिसने मान ली हार ,उसके लिए सब मुश्किल,
जिसने ठान ली जीत ,उसके लिए मुश्किल कुछ भी नहीं।
मुश्किल सब कुछ है, जब तू खुद को मान ले कमज़ोर,
मुश्किल कुछ भी नहीं, जब दिल बोले—मैं हूँ ज़ोर।
आज नहीं तो कल सही, पर जीत तुझे ही मिलेगी,
क्योंकि जो हार से लड़ गया—किस्मत उसी से गले मिलेगी ।
तो उठा, चल, चुप मत रह, ये वक़्त आवाज़ देता है,
जो खुद पर विश्वास करे—इतिहास वही लिखता है।
मुश्किल सब कुछ है? नहीं—ये बस एक भ्रम सही,
सच तो ये है तू इसे ही मान ले कि, मुश्किल कुछ भी नहीं।
DEEPSHREE

Wah
ReplyDeleteShukriya 🌻
DeleteExcellent ma'am
ReplyDeleteVery motivational
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