मसरूफ़
मसरूफ़ हर कोई आज खुद में है..
दुनिया में हर कोई घिरा कहीं -न कहीं खुद में है..
मसरूफियत का आलम आज कुछ इस कदर है छाया
पूछने पर भी न कोई इसका राज़ न जान पाया
मसरूफ़ कोई अपनी दुनिया में
मसरूफ़ कोई किसी दूसरे की दुनिया में
है कोई मसरूफ़ इस सोच में कि, मसरूफ़ मैं हो जाऊँ कैसे?
और कोई है
मसरूफ़ इस दुनिया में बताने के लिए
कि..
मसरूफ़ है वो, ये बात दुनिया को पता लगे कैसे? 😂😂😂😂
मसरूफियत का आलम छाया है जग में सभी पर कुछ इस तरह
कि..
खाली बैठा इंसान भी खालीपन को महसूस करने की मसरूफियत में है..
DEEPSHREE

100% correct dear
ReplyDeleteThanks mam❤️
DeleteAbsolutely true ma'am
ReplyDeleteThanks mam🌺
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