सोच में छिपा ,एक शिक्षक का सवाल..



किस जरूरत को  छोड़, किसे पूरा कर लूँ?
अपनी तनख़्वाह कईं बार गिनी है मैंनें.. 

किस ख्वाब को ,पूरा करने का अरमान मैं सजा लूँ?
 ख़्वाब  पूरा करने का वक्त़, उधार में पाया है मैनें ..

अपनी सूरत और सीरत कैसे सवार मैं लूँ? 
किसी और की सूरत और सीरत को निखारने का जिम्मा उठाया है मैनें ..

खुद को झोंक कर भी सुकून, कैसे महसूस मैं कर लूँ? 
मेरे वज़ूद को, टिकाए रखने का हर पल हिसाब लगाया है मैनें .. 

उस सोच और उम्मीद की डोर को कैसे मैं थाम कर रख लूँ?
जिसे बदलाव ला सकने का कारण बता, दिल को समझाया  है मैनें ..

 खुद्दारी, मान  सम्मान को खुद से दूर कैसे मैं कर लूँ?
जिसके रंग में ढ़ल ,चट्टान सा मज़बूत मुकद्दर बनाया हैं मैंनें..


 DEEPSHREE

                                                                                                   


 

Comments

  1. Absolutely stunning left me speechless 👏👏👏👏

    ReplyDelete
    Replies
    1. I hope you felt connected with the feeling expressed.

      Delete
  2. Mind blowing. Loved the way you expressed it with innate truth.keep shining ✨️ 💖

    ReplyDelete
  3. Absolutely true

    ReplyDelete
    Replies
    1. Ys, tried to pen down the Emotion as felt.. 🌸

      Delete

Post a Comment

भाव के अनुरूप पढ़कर प्रोत्साहित करें l

Popular posts from this blog

नारी: उलझनों में भी उजाला

बेटी का अनकहा दर्द.......

चुभन