यहाँ बात उसकी ही हो रही है जो.....
मान, सम्मान से मिलवाने वाला अपना मान ढूँढता है |
पल- पल निखारने में लगा वो, अपनी रौनक खोजता है ||
समझौता वो कर रहा अपने आत्मसम्मान से
पर फिर भी.......
हर कोई उसमें ही कमी खोजता है||
अनैतिक उम्मीदों के टोकरे का बोझ वो बेमन से उठाता है |
मन, मस्तिष्क में दर्द लिए वो देख सभी को मुस्काता है |
रोटी - पानी, परिवार को दरकिनार खुद को कर रहा वो साबित
पर फिर भी.......
शाम ढ़लने पर ,वो खुद को भी कुछ ढलका हुआ सा ही पता है |
उसकी सोच के पंखों को बाँध, उससे हर कोई उड़ान की उम्मीद जताता है |
सोचते नहीं उम्मीद रखने वाले कि, बंधे पंखों से क्या कोई उड़ पाता है?
वो लगा है खुद के आत्मसम्मान को बचाने की उधेड़बुन में
पर फिर भी .....
जीवन को आत्म-सम्मान संग जीने का पाठ पढ़ाता है |
जो आता है, उसे अपनी मनमर्जी का बोल कर चला जाता है |
शब्दों के चयन की मर्यादा को लाँघ, अपमान के दरिया में डूबो जाता है ||
असमंजस में खड़ा वो खुद को समझता और समझाता है
पर फ़िर भी ......
दिल पर लगी ठेस को हटा वो, मुख पर मुस्कान दिखलाता है ||
हैरानी है यह देखकर कि मान, इज्ज़त उसे छोड़ सभी का ही क़ीमती माना जाता है|
न लग जाए किसी को भी कहीं बुरा, यह सोच अन्य सभी के अभिमान को बढ़ाया जाता है |
माँ - बाप के बाद ईश ने भी है जिसे खास माना |
उसकी इज्ज़त, उसके स्वाभिमान को आज पैरों तले रौंदा जाता है ||
देश का भविष्य बनाने के लिए वो अपना वर्तमान झोंकता है|
देह ,मन -मस्तिष्क को गलाकर आज वो ही तिरस्कार झेलता है||
बदलती उम्मीदों के भार को नहीं पाया वो संभाल, एहसास इस बात का उसे हर पल दिलाया जाएगा
पर फ़िर भी....
देश को अवश्य , प्रकाशित सूर्य की चमक से वो मिलवा ही जाएगा |
इतना सब कुछ पढ़ और सुन समझ में आपके भी ध्यान में शायद यही आता है|
कि बात
यहाँ उसकी ही हो रही है जो गुरु शिक्षक, अध्यापक या आचार्य कहलाता है |
DEEPSHREE

Very nicely described 🌹💝
ReplyDeleteSunder abhivyakti
ReplyDeleteAati Sunder Abhivaykti . Sada ki tarha maan ko mooh liya. Hmesha kuch raho
ReplyDeleteHamesha kush raho
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