वक़्त कुछ, अपने संग भी बिताओ....
वक़्त कुछ अपने संग भी बिताओ,
बिताना कुछ वक़्त संग अपने भी ज़रूरी है |
अपने वक़्त में से, अपने लिए भी वक़्त निकालना ज़रूरी है |
अनुभवों को कुरेद जान पाओगे, क्या खोया क्या पाया तुमने ?
वक़्त रहते इस बात का भी हिसाब- किताब लगाना ज़रूरी है |
जीवन की दौड़ में समेटते रहते हैं हम, यादों के ढ़ेर
वक़्त रहते उस ढ़ेर में से, सच्ची यादों को ढूँढना भी ज़रूरी है
माना तुम्हारा वक़्त सिर्फ़ तुम्हारा ही नहीं, तुमसे जुड़े लोगों का भी है
पर ,वक़्त रहते सच्चे और अपनों का पता लगाना भी ज़रूरी है |
वक़्त बाँटो या बटोरो गुजरने आया है, और गुज़र जाएगा
पर.....
यदि वक़्त अपना अपने संग ही न बिताया
तो
अंत में संग तुम्हारे ,केवल मलाल ही रह जाएगा |
DEEPSHREE

Comments
Post a Comment
भाव के अनुरूप पढ़कर प्रोत्साहित करें l