किताब मुझे वो चाहिए......

 


किताब मुझे वो चाहिए जिसमें लिखा, पढ़कर लोग बताते हैं,

कि

घूमकर बाहर से आने पर औरत  रसोई में खाना बनाने और आदमी रसोई में बना खाना खाने के लिए बना है.... 


औरत तबीयत खराब होने पर परिवार के लोगों की तबीयत के बारे में पहले सोचे.... 


नींद आँखों में भरकर भी परिवार को सपने देखने के लिए ,लोरी औरत पहले सुनाएगी..


भूख लगी हो अगर कभी जोरों से, पर पहले रोटी घर का आदमी  ही शान से खाएगा....


बराबर का कमाने वाली अपने ऊपर खर्च भाई, पिता या पति से पूछ कर करेगी....


बात यहाँ ये नहीं की,  औरत को ये सब करना दर्द या तकलीफ देता है..

बात यहाँ ये है कि, उम्मीदों  और  ज़िम्मेदारी की पोटली कभी- कभी सम्मान से ना उठा पाना खलता है.....


                                                                                                                                       DEEPSHREE

Comments

  1. Superb Dear. Tumhari Har baat Sochne ko Mazboor kartee Hai .loved it.

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    1. Thanks for ur encouraging words 💐

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  2. Beautifully written

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भाव के अनुरूप पढ़कर प्रोत्साहित करें l

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