क्या, हमारा अस्तित्व साबित होगा?

 

                                                          



सभी  के उठने से पहले उठकर ही क्या, हमारा अस्तित्व साबित होगा? 

घर का सामान, परिवार के मुताबिक रख देने पर ही क्या ,हमारा अस्तित्व साबित होगा? 

खुद के लिए सब्जी, रोटी के ना बचने पर भी मुस्कुराने से  ही क्या, हमारा अस्तित्व साबित होगा? 

अपने फैसले सभी के मुताबिक लेने पर ही क्या, हमारा अस्तित्व साबित होगा? 

पूछ - पूछ सभी की पसंद का बना, अपने मन को मारकर ही क्या, हमारा अस्तित्व साबित होगा? 

खुद के दर्द को मुस्कुराकर  छिपा, परिवार के दर्द को आँख में भर दिखाने से ही क्या ,हमारा अस्तित्व साबित होगा? 

अपने वक़्त को सभी पर खर्च कर, खुद के लिए वक़्त  न देकर ही क्या, हमारा अस्तित्व साबित होगा? 

अपनी ख्वाहिशों को हर कदम पर रीति रिवाज़ की बली चढ़ाकर ही क्या ,हमारा अस्तित्व साबित होगा? 

भूख लगने पर भी परिवार को पहले खिलाने के संस्कारों को मानने से ही क्या ,हमारा अस्तित्व साबित होगा? 

टीवी, रेडियो लिस्ट सभी में समझोते की समझदारी दिखाने से ही क्या ,हमारा अस्तित्व साबित होगा? 

इच्छा को  संकुचाकर, डरकर पूछकर, जैसे पड़ावों को पार  कर ही क्या ,हमारा अस्तित्व साबित होगा? 


होता नहीं सभी के साथ यह फ़िर भी आत्मा को यह सवाल कभी -कभी कचोटता तो होगा कि....... 

क्या?????? 

समझोते को मुस्कराकर अपनाने से ही हमारा अस्तित्व साबित होगा? 

                                                                                                                                   DEEPSHREE

                                                        

Comments

  1. Wow ma'am amazing poem

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  2. Sahi kha PR kya kare apni k liye karna padta h yahi sanskar h

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    1. संस्कार और मज़बूरी में फर्क़ रखकर अपनी पहचान को ना मिटने देना भी जरूरी है...

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  3. Beautiful thoughts as ever

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  4. Aapke har ek pankti mein hi vikalp chupe hain. Ek baar buddhi se nahi Dil se padhiye

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  5. Beautifully described.

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  6. Very nice Ma'am dil tak pahuch ti hai

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