सन्देश पेड़ का...🌳🌳
रूप मेरा ,इतना अनोखा।
हूँ मैं, मानव जीवन का झरोखा ।।
कहलाता हूँ ,घर में किसी का।
हूँ मैं, जीवन -दायक सभी का ।।
तन कर खड़ा हूँ छाया मैं ,बखरने को अपनी।
तुम्हारी पहचान बचाने के लिए पहचान मैं खोने को अपनी।।
मेरी जड़े देती हैं मजबूती, तेरे अस्तित्व की जड़ों को ।
क्यों काट रहा है बन मतलबी तू ,मेरी साँसों को?
फल ,फूल और घरोंदा सभी तो दे रहा हूँ।
सोचता हूँ मैं फिर क्यूँ बेरुखी तेरी सह रहा हूंँ?
DEEPSHREE

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भाव के अनुरूप पढ़कर प्रोत्साहित करें l