रुकना नहीं.....

                                 



रुकना नहीं, किसी के कहने पर ।

ठहरना नहीं ,किसी के कहने पर ।।

दस्तूर दुनिया का अब बदला सा है 

क्योंकि 

तुम्हें ठहर कर रोकने वाला ।

खुद चलता है ,अपने ही कहने पर ।।

किसी की खातिर गर तुम ,रुकोगे।

याद रखना, मंजिल पर अपनी  देर तक पहुँचोगे ।।

रुके हुए पानी में, काई सी जम जाती  है ।

ठेहरे हुए इंसान की तकदीर भी थम जाती है ।

रुको नहीं, रफ्तार अपनी बनाए रखो।

थमो नहीं किसी के लिए, मंजिल पर अपनी नजर रखो।।

तजुर्बा कहता है रुकने वाला रुका रहा,  रोकने वाला बढ़ जाता है ।

 रोकने वाला कह जाएगा कि,रुके क्यों  तुम मेरे लिए?

मैंने तो नहीं कहा था......

                                                                                                                               DEEPSHREE

Comments

Post a Comment

भाव के अनुरूप पढ़कर प्रोत्साहित करें l

Popular posts from this blog

नारी: उलझनों में भी उजाला

बेटी का अनकहा दर्द.......

चुभन