अगर हाँ,अगर नहीं .......

                                                        

 कभी सपनों को टूटने का दर्द झेला है?

कभी अनकहे अनसुलझे सवालों का धक्का झेला है ?

कभी मन में दबे जज्बातों का बोझ झेला है ?

कभी ख्वाहिशों को पूरा न करना सकने की कमी का दर्द झेला है ?

कभी मंजिल को बीच राह में छोड़ देने का दुख झेला है? कभी लोगों का तुम्हारे सपनों पर  हँसनेका अंधकार झेला है?

अगर नहीं ..........

तो या तो सपना सच नहीं है, या सपना अभी दिल- दिमाग में उतरा ही नहीं है ।

अगर हाँ..........

तो राह तुम्हारी मंज़िल को पाएगी ।

दुनिया एक दिन तुम्हारी जैसी ही मंजिल को पाना चाहेगी ।

                                                                                                                                DEEPSHREE

Comments

Post a Comment

भाव के अनुरूप पढ़कर प्रोत्साहित करें l

Popular posts from this blog

नारी: उलझनों में भी उजाला

बेटी का अनकहा दर्द.......

चुभन