ऐ नींद
ऐ नींद ,कभी तू यूँ भी आ .....
कि तेरे आने की भी कोई आहट न हो।
घबराहट न हो कोई दिल में, चिंता के निशान तक का भी कोई वजूद न हो।
हो जाएँ गुम हवाएँ ,भी खामोशियों के सन्नाटे में,
तेरे आने से सूखे पत्तों पर रखे पैरों से भी ,कोई सरसराहट न हो।
वक़्त की न रहे परवाह, कर दे मुझे तू इतना बेफ़िक्र ।
दे ज़रा सुकून मुझे कुछ ऐसा ,दिल में कोई हडबड़ाहट न हो।
सुन ले ऐ नींद ,दरख्वास्त एक मेरी
जकड़ ले कभी तो मुझे इस कदर
कि फिर किसी ख्वाब में भी, कोई रुकावट न हो।
DEEPSHREE

Beautiful 🥰
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