नारी हो तुम, अभिमान करो


                                                                                      


देश को विकसित करना है तो, नारी को विकसित  करना होगा।

देश  को मज़बूत  करना है तो, नारी को मजबूत करना होगा।
देश के लिए  निर्णय लेना है तो , नारी को सशक्त  करना होगा।
देश को दिशा देनी है तो,नारी को दिशा से अवगत कराना  होगा।
देश की रीढ़ को मज़बूत करना है तो, नारी की कमर को मज़बूत करना होगा।
देश को शिक्षित करना है तो,नारी को क,ख,ग सिखाना  होगा।
देश का स्वरुप बदलना है तो, नारी के स्वरुप को निखारना होगा।
देश को  ऊँचाइयों तक  पहुँचाना  है तो, नारी को विकास की   ऊँचाइयों तक पहुँचाना होगा।

क्यूँकी

वो लहर है,सागर की वो उड़ती मीठी पवन  है।
वो कोश है खुशियों  का,इच्छाओं  का शमन है।
वो ही है ब्रह्माण्ड ,उससे ही सृष्टि है।
वो ही है जिससे है जीवन,उससे ही चमकी दृष्टि है।
तो
सुनो नारी हो अबला नहीं ,दुर्गा स्वरुप हो तुम।
दिखा कर बता दो दुनिया को स्वयं में इक अभिमान हो तुम।
उठो लड़ो , अब  आगे बढ़ो ,समस्याओं  का खुद समाधान बनो।
अबला नहीं,तुम बलशाली हो, इस बात पर तुम अभिमान करो।

                                                                                                                                     DEEPSHREE

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