भाई
बहन के अस्तित्व की परछाई को जो है संभालता।
पिता के हौंसले को लिए जो है ,दिखता।माँ का लाड़ को जो पग-पग में है, बिखेरता।
दोस्त का अंश लिए जो है, संग चलता।
जिसकी मौजूदगी से विकराल कष्ट भी अंश मात्र है दिखता।
जो देता बहन को ,उसके खास होने का एहसास।
जो अन्जाने में ही पूरी कर जाता अनकही सी बहन की ,हर आस।
जो लड़कर भी ,कभी-कभी मान जाता है गलती।
जो परिवार की आशाओं,आकांक्षाओं को है पूरा करता।
जो करता समझौता अपनी इच्छाओं का ,अपने से जुडो के लिए।
जो चाहे छोटा हो या बड़ा पर, जिम्मेदार है कहलाता।
पुकारे दुनिया चाहे नाम किसी से भी उसे
पर......
अर्थ में सभी बहनों के लिए भाई ही है वो कहलाता।।
DEEPSHREE
Bahut sunder
ReplyDeleteएक पवित्र रिश्ते की कसौटी को उजागर किया है। अति उत्तम
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