इन्तज़ार
इन्तज़ार
हर पल पर अपनी अनचाही रोक, सी लगा जाता है।हर साँस को थमा सा जाता है ।
सोच को ठहराव से मिलवा जाता है ।
बोल सकने वाली आँखों को ,पत्थर सा बना जाता है |
सही गलत में द्वंद का करा जाता है ।
असहाय सा दर्द दिल को दे जाता है ।
छुपे भाव को बेपर्दा सा कर जाता है ।
दिमाग में सरसराहट, दिल में घबराहट सी भर जाता है।
कहता है कुछ पर, समझा कुछ और ही जाता है।
सब्र रखने वालों को बेसब्र सा बना जाता है।
कभी मिलवा जाता है ,अनचाही खुशी और गम से भी ।
दे जाता है ठहराव कभी-कभी जिंदगी को भी।
सही गलत में द्वंद का करा जाता है ।
असहाय सा दर्द दिल को दे जाता है ।
छुपे भाव को बेपर्दा सा कर जाता है ।
दिमाग में सरसराहट, दिल में घबराहट सी भर जाता है।
कहता है कुछ पर, समझा कुछ और ही जाता है।
सब्र रखने वालों को बेसब्र सा बना जाता है।
कभी मिलवा जाता है ,अनचाही खुशी और गम से भी ।
दे जाता है ठहराव कभी-कभी जिंदगी को भी।
DEEPSHREE
Very touching 🥺
ReplyDelete👍🏼🌺👍🏼
DeleteWha wha kiya baat too Good seedha dil say ����
ReplyDeleteThanks 🌺🙏🌺
DeleteToo good
ReplyDeleteThanks🌺
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