तो कैसे मुमकिन है ?

 

            


आसमान को क्या किसी ने बुलंदी से रूबरू करवाया?

 हवा का रुख,क्या कोई है बदल पाया?
 नदी के प्रवाह को राह, क्या कोई है दिखा पाया?

 रोशनी से सूरज को क्या कोई है मिलवा पाया ?
 धरती के बोझ, का कोई अंदाजा भी है लगा पाया ?

 चाँद को शीतलता से, क्या है किसी ने मिलवाया?
 बारिश की बूँदों को क्या किसी ने लगा सीढ़ी, धरती तक पहुँचाया?

 बीज को ,पौधा बनने का क्या किसी ने ज्ञान है करवाया?
 धड़कन का दिल की गहराइयों से,क्या किसी ने परिचय है करवाया ?

 तो कैसे मुमकिन है?

माँ के हृदय में पनपती ममता को तोल पाना।

                                                                                                                                  DEEPSHREE

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