हमारा भविष्य उज्जवल है ...
इक वक़्त था ..
जब,तन ढकना इक जरूरत थी, तो लोग इसके लिए प्रयास करते थे।
प्रयास आज भी करते हैं पर अब ,तन को न ढकने का।
और हम कहते हैं,कि हमारा भविष्य उज्जवल है |
जब,
बुजुर्ग घर की शान माने जाते थे ।
अब तो लोग अपनी शान की खातिर वृद्धा आश्रम की राह उन्हीं बुजुर्गों को दिखाते हैं।
और हम कहते हैं कि हमारा भविष्य उज्जवल है |
जब,
बच्चों में बचपन झलकता था, पर आज
बच्चों में बड़प्पन और बड़ों में बचपन झलकने लगा है।
और हम कहते हैं कि हमारा भविष्य उज्जवल है |
और हम कहते हैं कि हमारा भविष्य उज्जवल है |
जब,
चूल्हे पर बनी पहली रोटी ईश का रूप माने जाने वाली गाय, को दिया करते थे।
पर अब बचा हुआ खाना, प्लास्टिक में डाल उसे दे आते हैं ।
और हम कहते हैं कि हमारा भविष्य उज्जवल है |
जब,
बेजान खिलौने समय बिताने के लिए इस्तेमाल होते थे |
पर आज हम लोगों के दिल को ही खिलौना मान बैठे हैं ।
और हम कहते हैं कि हमारा भविष्य उज्जवल है |
जब,
ज़ुबाँ की कीमत होती थी|
और हम कहते हैं कि हमारा भविष्य उज्जवल है |
जब,
ज़ुबाँ की कीमत होती थी|
पर अब ज़ुबाँ के अलावा हर चीज़, कीमती नज़र आती है।
और हम कहते हैं कि हमारा भविष्य उज्जवल है |
और हम कहते हैं कि हमारा भविष्य उज्जवल है |
DEEPSHREE
Kya baat kya baat kya baat super didi.. very true lines..god bless you 🙏👍❤️
ReplyDeleteThanks dear..🌺💚
DeleteBilkul sahi kaha.....samajhta kon hai
ReplyDeleteSach kaha🙏
Deletepar jo samjta hai wo hi nikharta hai.🌺