ताक़त रेडियो की
मारकोनी ने पत्थर फेंका पानी में ।
उठी तरंग छा गई लहर फिर पानी में ।।सोचा ,जल में तरंग गर उठ सकती है ।
तो मानव बोली में भी तरंग कमाल कर सकती है।।
दौडाए दिमाग के घोड़े ,कर डाला रेडियो का आविष्कार।
तरंग को तरंग से जोड़कर कर डाला जन-जन पर उपकार।।
अब एक यंत्र से विचारों को सुना,बोला जाने लगा।
लगा यूँ कि मानव जीवन का एक सुनहरा पल गड़ा जाने लगा ।।
विस्तृत हो गई विचारों की सीमा।
करने लगा मनुष्य विश्व की परिक्रमा।।
घट रहा जो आस- पास पहुँचा सीधा कान तक ।
संदेश वाहक बन ऐसा जो पहुँचा घर और दुकान तक ।।
शिक्षा को,विज्ञान को दिया मनोरंजन को भी एक नया आयाम।
घर बैठे अपनी भाषा में जानकारी चाहे कला हो या व्यायाम।।
रेडियो ने संचार के क्षेत्र में दिखाया अनोखा प्रदर्शन।
बन गया है हिस्सा जीवन का दिखा,प्रभावी परिवर्तन।।
लगा यूँ कि मानव जीवन का एक सुनहरा पल गड़ा जाने लगा ।।
विस्तृत हो गई विचारों की सीमा।
करने लगा मनुष्य विश्व की परिक्रमा।।
घट रहा जो आस- पास पहुँचा सीधा कान तक ।
संदेश वाहक बन ऐसा जो पहुँचा घर और दुकान तक ।।
शिक्षा को,विज्ञान को दिया मनोरंजन को भी एक नया आयाम।
घर बैठे अपनी भाषा में जानकारी चाहे कला हो या व्यायाम।।
रेडियो ने संचार के क्षेत्र में दिखाया अनोखा प्रदर्शन।
बन गया है हिस्सा जीवन का दिखा,प्रभावी परिवर्तन।।
DEEPSHREE

Good one
ReplyDeleteThanks💐
DeleteReally nice
DeleteThanks mam💐
DeleteHello mam aap kaha se ho
DeleteGhaziabad
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