तेरी राह ......




राह तेरी ,तेरी ही राह है।

जिसे पाना सिर्फ तेरी ही चाह है ।
जिसका सपना देखा तूने बंद और खुली आँखों से 
उसे तू ही करेगी पूरा समेट कर अपनी बाहों से ।
मंजिल का सपना जब तूने संजोया है तो,रख यकीन 
क्योंकि जीत का बीज भी तूने ही बोया है ।
जो कठिन है वही आया है ,तेरे सपनों में पाने को।
कर दृढ़ निश्चय ,उस लक्ष्य को खुली आँखों  से पाने को।।
आएँगी रुकावटें निश्चित है उनका आना।
भेद कर उस चक्रव्यूह को मंजिल को है तुझे पाना।।
विश्वास को कर दृढ़ लक्ष्य को देख ,अर्जुन के समान
हिम्मत का धनुष-बाण उठा कर भेद दे आज मछली की आँख।।
राह कोई भी हो आसान नहीं होती लेकिन....
 सुना है हमने, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ।
                                                                                                          DEEPSHREE

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