परिवर्तन ...
आज का सन्नाटा कल के शोर से मुझे बचा गया।
मन में छुपे तूफान को ,पल में ही शांत वो करवा गया।।खिड़की का वो कोना, छत की वो मुंडेर।
भ्रम की दीवारों को आज ,कर गई वो ढेर।।
जाना- पहचाना लोगों से कुछ दिन दूर , यूँ रहकर।
खास छोड़ो, हम आम भी नहीं उनके लिए कुल मिलाकर।।
ज़िंदगी का मकसद जिस को भी, मानने की कर बैठे गलती।
उन्ही की नजरों में देख जाना,मौजूदगी हमारी कितनी है खलती।।
DEEPSHREE

Heart touching
ReplyDeleteThanks dear💕
DeleteBeautifully written💕
ReplyDeleteThanks for ur appreciation.. 💕
DeleteVery deep!!! You are so natural at it..
ReplyDeleteThanks 💐
DeleteHeart touching 💖
ReplyDeleteThanks 💐
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