अन्धकार इक अभिशाप का (बाल विवाह)
सुना मैंने कविता और कथाओं में ।
धर्मों में अपने और अपनी परंपराओं में ।।
मैं ही कन्या ,मैं ही लाडली।
मैंने ही हर रिश्ते में खुशियाँ डाली।।
पर
कैसा अजब यह नियम बनाया।
मुझ कोमल फूल को ,पल-पल जिसने दबाया ।।
जीवन का अर्थ, अभी मुझे मालूम नहीं।
रिश्तों का भाव ,अभी मुझे मालूम नहीं।।
मेरे नाजुक कंधों पर शादी का बोझ क्यों डाल दिया।
लगा ऐसा, जैसे खुले परिंदे को खूँटे से किसी ने बांध दिया।।
छोटी सी है उम्र मेरी ,कोमल से है हाव-भाव।
कृत एक गुनाह जैसा, खेल गया मुझ पर दुख का दावं ।
कहना चाहूँ कुछ मैं तुमसे, मुझसे तुम मुँह ना मोड़ो।
क्यों है जल्दी ब्याह की मेरी ,लिख -पढ़ तो मुझे जाने दो।
ममता प्रेम की मैं हूँ मूर्ति ,पूरी तो गढ़ जाने दो।।
तितली मैं बगिया की तुम्हारी ,कुछ सैर सपाटा तो करने दो।
अंधकार ये अभिशाप का, मेरे अस्तित्व को मिटा देगा।
आने वाला वर्तमान भी ,बीते समय को ना दुआ देगा।।
अपना कल बचाना है तो, मेरा आज बचा लो तुम।
मानवता का दे परिचय मुझे, दर्द से बचा लो तुम।।
धर्मों में अपने और अपनी परंपराओं में ।।
मैं ही कन्या ,मैं ही लाडली।
मैंने ही हर रिश्ते में खुशियाँ डाली।।
पर
कैसा अजब यह नियम बनाया।
मुझ कोमल फूल को ,पल-पल जिसने दबाया ।।
जीवन का अर्थ, अभी मुझे मालूम नहीं।
रिश्तों का भाव ,अभी मुझे मालूम नहीं।।
मेरे नाजुक कंधों पर शादी का बोझ क्यों डाल दिया।
लगा ऐसा, जैसे खुले परिंदे को खूँटे से किसी ने बांध दिया।।
छोटी सी है उम्र मेरी ,कोमल से है हाव-भाव।
कृत एक गुनाह जैसा, खेल गया मुझ पर दुख का दावं ।
कहना चाहूँ कुछ मैं तुमसे, मुझसे तुम मुँह ना मोड़ो।
मैं हूँ नन्ही कली सी अभी भी ,यूँ ना मेरे सपनों को तोड़ो ।।
क्यों है जल्दी ब्याह की मेरी ,लिख -पढ़ तो मुझे जाने दो।
ममता प्रेम की मैं हूँ मूर्ति ,पूरी तो गढ़ जाने दो।।
तितली मैं बगिया की तुम्हारी ,कुछ सैर सपाटा तो करने दो।
कच्ची मिट्टी, जैसे इस तन को कुछ तो पक्का होने दो।।
क्षमता मुझ में ,सीता बनने की सावित्री भी मैं बन सकती हूँ ।
क्षमता मुझ में ,सीता बनने की सावित्री भी मैं बन सकती हूँ ।
वीर पराक्रमी शिवाजी जैसे महापुरुष, भी जन सकती हूँ।
कर पाऊँगी यह सभी ,आने तो दो समय उचित।
कच्चे तन और मन पर, बोझ डालना होगा अनुचित।।
कर पाऊँगी यह सभी ,आने तो दो समय उचित।
कच्चे तन और मन पर, बोझ डालना होगा अनुचित।।
अंधकार ये अभिशाप का, मेरे अस्तित्व को मिटा देगा।
आने वाला वर्तमान भी ,बीते समय को ना दुआ देगा।।
अपना कल बचाना है तो, मेरा आज बचा लो तुम।
मानवता का दे परिचय मुझे, दर्द से बचा लो तुम।।
DEEPSHREE

Lajwab humari kavitri❤️
ReplyDeleteShukriya meri abhinetri..❤
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