पर्व प्रकाश का.....




पर्व प्रकाश का दे हटा,दुख का अंधेरा ।

प्रकाशित करे जीवन को ,सुख का नवीन सवेरा।।
बीत  गया वर्ष ले गया,संग अपने कुछ खुशियाँ  हमारी।
जिसे था अपना माना,वो ही  यादों  पर दिख रहा भारी।।
प्रज्वलता दीपों  की खुशियाँ  दे जाए ।
सोच में सोची,सोच से भी प्रभु झोली  भर जाए ।।
पर्व ये उल्लास और  अपनेपन का है।
छटेगा इसी की मौजूदगी  में क्यूंकि, अन्धकार बस यह पल- भर का है।।
उम्मीदों का दीपक, करो आज भी प्रज्वलित ।
पूरी होगी  उम्मीदें जिनकी चुका चुके  हम कीमत।।
प्रार्थना है ईश से ,हो कुशल मंगल अब सब।
विपत्ति  हो नष्ट सुख -समृद्धि से परिपूर्ण हो सब।।

                                                                                                                                   DEEPSHREE

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