पर्व प्रकाश का.....
बीत गया वर्ष ले गया,संग अपने कुछ खुशियाँ हमारी।
जिसे था अपना माना,वो ही यादों पर दिख रहा भारी।।
प्रज्वलता दीपों की खुशियाँ दे जाए ।
सोच में सोची,सोच से भी प्रभु झोली भर जाए ।।
पर्व ये उल्लास और अपनेपन का है।
छटेगा इसी की मौजूदगी में क्यूंकि, अन्धकार बस यह पल- भर का है।।
उम्मीदों का दीपक, करो आज भी प्रज्वलित ।
पूरी होगी उम्मीदें जिनकी चुका चुके हम कीमत।।
प्रार्थना है ईश से ,हो कुशल मंगल अब सब।
विपत्ति हो नष्ट सुख -समृद्धि से परिपूर्ण हो सब।।
DEEPSHREE

Very right💯😘
ReplyDeleteThanks❣
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