कोरोना संग टीचिंग ....

कोरोना की ऐसी एक घडी।
जो ले आई चुनौती इक बड़ी ।।
किया हमें स्टाफ -रूम से दूर।
घर बैठे पढ़ाने को हुए हम मजबू
12 बजे करते हैं नाश्ता |
बना हो चाहे यम्मी पास्ता ,
दौड़ - भाग अजीब सी होती |
एक पल चैन से न मिलती रोटी |
बच्चे देख होते भोचक्के।
छूट जाते उनके भी छक्के ।।
बच्चा बोले, मैडम है आई।
संग अपने पीपीटी है लाई।।
मम्मी भागे इधर-उधर।
ढूँढे छुपने वाली डगर ।।
ढूँढ़ते दिखते चीजें पापा ।
हो परेशान छोड़ते आपा ।।
झाड़ू लिए बाई है आती |
अंग्रेजी सुन रहती मुस्काती ||
तमाशा हम यह बैठे देखते हैं।
फिर भी हर पल मुस्कुरा देते हैं
पहले उठते थे ,स्कूल जाने को।
अब उठते हैं लैपटॉप पाने को।।
तारों के जाल में सदा घीरे
कहाँ है चार्जर,पूछते रहते ।।
फोन बजता हजारों बार।
उठा उठा गए हम हार ।।
सवाल एक ही फोन पर भाई।
मैडम क्या आपने पीपीटी बनाई ?
रिपोर्ट भेजो ,फॉर्म भरो ।
बाद में नहीं ,अभी करो ।
एक्सेल शीट से हुए परेशान।
गूगल शीट करती हैरान।।
मुस्कुराकर करते काम ।
शिक्षक होना हमारी पहचान।।
बादल गरजने पर कभी थे नाचते ,पर
अब बादल गरजने पर खुद ही हैं गरजते
ना दिखता कोई भी हल ।
दिल धड़क बोले हर पल
ऑल इज वेल ऑल इज वेल
आई ऐसी एप इक ज़ूम ।
जो जीवन में मचा गई धूम।
गिरा पासवर्ड का एक भी अंक ।
समझो हो गई उसकी क्लास ही बंक।।
नई एप्लीकेशन में मारे दिमाग ,
इंटरनेट भी दे चला जवाब
चॉक डस्टर से बन गई दूरी।
कहाँ से आ गई ये मजबूरी?
परेशानी चाहे कितनी भी आए।
टीचर सदा ही मुस्कराए ।।
वाकिफ़ है वो अपनी ताकत से।
बोझ सहने की आदत से।।
क्यूँकि
पहचान , अवगुणों को गुणों में
शिक्षक ही केवल ऐसे चमत्कार कर
DEEPSHREE
Good 👏👏👏
ReplyDeleteThanks 😊
DeleteWow saari baaten kavita k roop me ,jo daily routine ho gya h hm sabka🤗👌👍
ReplyDeleteDhanyawad👍
DeleteWowooo kya bhub explain keya hai poetry ke meadham se 🙏🙏🙂🙂
ReplyDeleteShukriya ji👍
DeleteWonderful
ReplyDeleteWonderful dear 👌👌
ReplyDeleteShukriya
DeleteOur daily routine..
ReplyDeleteAbsolutely true👍👍
DeleteVery nice and apt in present situation Good work keep it up .
ReplyDeleteThanks alot for ur appreciation.
Deleteबढ़िया बहुत बढ़िया
ReplyDeleteप्रोत्साहन के लिए शुक्रिया....
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