आँखें.....
वो देखती भी हैं, वो सहती भी हैं।
शब्दों के बिना वो हर क्षण कुछ कहती भी हैं।
नज़ारों की अताह गहराई भी है उसमें ।
अनुभवों की असीमित दुनिया है उसमें ।
बेज़ुबान की ज़ुबाँ है वो ।
कह सकने वालों का, पर्दा है वो।
दिल के एहसास को हूबहू दिखाती हैं वो।
खुशी को खुशी,दर्द को दर्द कह जाती है वो।।
है पर्दा उस पर भी, जिसे ओड़ वो रहतीं हैं ।
क्या बताना,क्या छुपाना इसका द्वंद्व झेलती है वो ।
आएना वो एहसासों का,जो पल-पल होती चकनाचूर ।
सह बोझ शर्म-लाज़ का ,जो पल-पल रह्ती है मजबूर।।
हैं वो गिनती में दो,पर अलग -अलग बोझ सहती हैं।
पल में गर एक मुस्काए ,तो दूसरी खुद को भरती है ।।
है वो कोमल सा भाग सभी का, हर पल सबका साथ निभाए।
बन मनुष्य की संगी साथी,वो कोमल आँखें कहलाए।।
DEEPSHREE

Kaise likh pati hai yaar😘
ReplyDeleteआँखों से पढ़,देखऔर समझ कर...❤
DeleteAakho ka sahi varnan... badiyaaa
ReplyDeleteWowoo kya khub leekha hai etna sunder mn ko chu lene vale kavita👍👍🙏🙏
Deleteप्रोत्साहन के लिए शुक्रिया🙏
Deleteदिल को छूने वाला यथार्थ. अति सुन्दर अभिव्यक्ति. 👌♥️
ReplyDeleteधन्यवाद 🙏
DeleteBhaut badiya Ma'am
ReplyDeleteShukriya 🙏
DeleteBahut khoobsurat
ReplyDeleteShukriya 👍👍
DeleteWowwwwww tooo good
ReplyDeleteAmazing the way you use your words
ReplyDeleteThanks mam❤
DeleteBeautiful lines
ReplyDeleteThanks for appreciation
DeleteBeautiful lines
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