क्या उम्र है पैमाना प्यार का?




क्या उम्र है पैमाना प्यार का?

खुद को भूल इक खास को जानने का?

क्या  उम्र के मुताबिक  दिल चलता है?
क्या देख वो किसी ,को सोच कर कुछ करता  है?

गर यूँ  होता दिल तो उम्र को देख मुरझा  जाता।
उम्र की सीढ़ी तय  कर बूढ़ा हो वो भी शायद मर ही जाता।

पर..........

एक दिल ही नियामत बक्शी है खुदा ने ।
जिसने  अपने में समेटे  सुनहरे पल,खुबसूरत  अफ्साने।।

तोले जो प्यार को उम्र के तराज़ू  में ।
खोखला वही रह जाएगा,उम्र को एहमियत देने में ।।

दिल की अच्छाई ही  खिंचाव का कारण बनती है।
पर, ज़्यादा अच्छा दिल रखने से अन्त में आत्मा तक तडपती है।।

उम्र को कारण बना,दिल की करने वाले बेकदरी ।
होंगे शायद  अच्छे,पर दिल से  शायद हैं बेदर्दी ।।

तलाश  में प्यार के,उम्र को एहमियत  जो दे बैठे।
वक़्त यकीनन उन्हे चेताएगा,की जान-बुझ गुनाह वो क्या कर बैठे?

                                                                                                                  DEEPSHREE

Comments

Post a Comment

भाव के अनुरूप पढ़कर प्रोत्साहित करें l

Popular posts from this blog

नारी: उलझनों में भी उजाला

बेटी का अनकहा दर्द.......

चुभन