बचपन
क्या मज़े अब पचपन में ,जो थे मजे , उस बचपन में।।
किए दूध के कुल्ले ।
चूस अंगूठा बने गाल रसगुल्ले ।।
बचपन में लगा गर्मी है ऊन में ।
बड़े हो जाना, पड़े गर्मी सिर्फ़ जून में।।
पालना लगता था रॉकेट जैसा ,
जिसके बने थे हम ,लाडले पायलट।।
वही पालना था, खाने की जगह उसे ही माना था हमने टॉयलेट।।
चलता फिरता परिवार का कोई भी मुँह में खिलाने को कुछ भी ठूसता गया ।
चलते फिरते हमने भी मनमार बेस्वादी का घूँट पिया।।
कटोरी को टकोरी, हेलीकाप्टर को हेलिपटोटर कह मुस्काए।
जिसे याद कर ,आज भी माँ मेरी लाड़ से बलिहारी जाए।।
लड्डू ,लाडला ,मोटू ,गोलू पुकारा अटपटे कई नामों से। आज दिमाग ,लगा जाना पहचान आज भी बरकरार है उन्हीं नामों से ।।
पत्तों से सब्जी ,पत्तों से रोटी बनाई बचपन में ।
अब रोटी ना रोटी, सब्जी ना सब्जी लगे उम्र पचपन में।।
रस्सी कूद हाथ पैर तुड़वाया ।।
नाचे दोस्त बोल बार-बार बहुत मजा आया, बहुत मजा आया ।।
जन्मदिन पर केक लगे ,सारा अपने ही पेट में जाए।
केक कट जाने पर दूर-दूर तक कोई नजर ना आए ।।
बिन कपड़े मेहमानों से थी मुलाकात भी प्यारी ।
फ्रॉक, निक्कर में वार्डरोब थी, सिमटी मेरी सारी ।
काश ,बचपन लौट आए फिर से हो लाड़ की बरसात।
कभी ना जाए ,हमें छोड़कर थामे रहे सदा हमारा हाथ।।
DEEPSHREE

Wah wah aapne to hamko bhi bchpan me lota diya.
ReplyDeleteExcellent views
Thanks for appreciation 😊
DeleteBadiyaaa....bachhpan yaad aa gya
ReplyDeleteShukriya😊
DeleteWeldon..bachpan sach me khoobsurat tha
ReplyDeleteVery true..😊thanks
DeleteB wonderful poetry
ReplyDeleteThanks alot
DeleteMaza aa gaya bachpan ki sair ho gyi
ReplyDeleteUmeed hai maza aaya hoga bachpaan ki ghumi ghumi karke..☺☺☺🥰🥰
DeleteMaza aa gaya bachpan ki sair ho gyi
ReplyDeleteThanks alot mam 4 appreciation..
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