मैं हूँ कलाकार.....
करता खुशियों के लेन - देन का व्यवहार |
खुशियों का बाँटता हूँ मैं , हर हिस्सा |
मुझसे रंगीन महफ़िल का हर इक हिस्सा |
जरिया हूँ मैं, ख़ुशी को चौगुना कर जाने का |
पल भर के लिए ही सही ,गम को आपका पता भुलाने का |
पर धड़कनो को ताल पर धड़कना सीखने वाला आज अपनी धड़कनो को थामे बैठा है |
सोचता है, की आज ज़माना उसे शायद भुला बैठा है |
ख़ुशी की सौगात बांटने वाला आज भूखा है ,प्यासा है ,बीमार है |
सोचता है आज इन हालात में वह कहीं थम की ,
बांटी ख़ुशी का कुछ हिस्सा मुझे भी मिले क्या यह मेरा सोचना बेकार है ?
DEEPSHREE

Wonderful 👏
ReplyDeleteBahut badhiya
ReplyDeleteThanks Aggarwal 😘
DeleteKya baat
ReplyDeleteThanks mam😘
DeleteShukriya
ReplyDelete👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻
ReplyDelete🙏🙏🙏😘😘
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