मैं हूँ कलाकार.....

मैं हूँ कलाकार ,

करता खुशियों के लेन - देन का व्यवहार |

खुशियों का बाँटता हूँ मैं , हर हिस्सा |

मुझसे रंगीन महफ़िल का हर इक हिस्सा |

जरिया हूँ मैं, ख़ुशी को चौगुना कर जाने का |

पल भर के लिए ही सही ,गम को आपका पता भुलाने का |

पर धड़कनो को ताल पर धड़कना सीखने वाला आज अपनी धड़कनो को थामे बैठा है |

सोचता है, की आज ज़माना उसे शायद भुला बैठा है |

ख़ुशी की सौगात बांटने वाला आज भूखा है ,प्यासा है ,बीमार है |

सोचता है आज इन हालात में वह कहीं थम की ,

बांटी ख़ुशी का कुछ हिस्सा मुझे भी मिले क्या यह मेरा सोचना  बेकार है ?

                                                                DEEPSHREE


 


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