है वो बेजुबान पर, फिर भी समझता है...


                                                      

है वो बेजुबान

है वो बेजुबान पर, फिर भी समझता है,

आँखों की भाषा ।

शब्दों से अनजान होकर भी, सोच की परिभाषा ।।

समझता है...

कदम-कदम में छिपे मेरे भाव।

महसूस जो करूँ वह, अनदेखा अभाव।।

समझता है...

आँखों की पुतलियों तक में छुपी खुशी को।

अपना बन, न कह सकने वाली उन्हीं आँखों की नमी को।

समझता है...

चाहूँ मैं क्या, जो वह पल में ही करे।

डर, प्यार भरा बस मेरा हो,बाकी दुनिया उससे डरे ।

समझता है...

लाडला है वो, मेरे परिवार का।

हकदार है वो,मेरे प्यार और दुलार का।।

समझता है...

मेरी बोली और भाषा के भाव में क्या गलत है, क्या सही?

थोड़ी मनमर्जी कर अपनी करता जिसे मैं कहूँ, सही।

समझता है...

शहंशाह ,बन घूमता हर कोने में यहाँ-वहाँ ।

जहाँ इजाजत हमें ना मिलती, जा सकता है वो ही वहाँ ।

समझता है...

कि कैसे उसकी इंतजार से भरी आँखें मुझे, मेरी अहमियत से मिलवाती हैं।

उस मंजर को कर महसूस, आत्मा सुकून से मिल जाती है।।

समझता है...

घर के नियम ,धर्म और कायदे।

पालन उनका गर करेगा तो होंगे ,सिर्फ फायदे ही फायदे।

समझता है...

दरवाजों और घर की घंटी की आवाज को।

रहता चौकन्ना सुरक्षा में अपनी, बड़ी जिम्मेदारी निभाने को।

समझता है ...

टेढ़े -मेढ़े नाम से हम क्यों उसे पुकारते?

अपनेपन और लाड से क्यों रहते उसे पुचकारते ।


वह वो समझता है , जिसे समझना इंसान के बस की बात नहीं।

अहमियत करनी हो अगर महसूस अपनी ,तो इससे बढ़कर कोई साथ नहीं।



है वो बेजुबान फिर भी दिल की बात को समझ, आँखों से भी साथ होने की तसल्ली देता है।

है वो बेजुबान , है वो बेजुबान....

                                                                                                                                              DEEPSHREE

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