बात कलम से.....


                                                
कलम उठाई , कुछ लिखने के लिए ।
मन में उठे बवंडर को ,शब्दों में पिरोने के लिए।।

कलम बोली, मुझ से नहीं  मुँह से कह दे जज़्बात।
उड़ेल दे मन के भावो को, शब्दों से करके बात ।।

कहा कलम ने ....

कहने से कह पाएगी,दिल का हाल।
मिलेगा सुकून ,न रहेगी बेहाल।।

कहा मैंने कलम से तू तो सुनती है ,समझती है।
जो चाहूँ जैसा चाहूँ तू वैसे ही ,भावों को उड़ेलती है।।

पर जिसे कहना है, वो दिमाग़ और दिल को मिलाता है।
कभी अपना ,कभी पराया बन अपनी धुन में ही जीता जाता है।।

तू , मेरी उँगलियों और शब्दों का तालमेल बैठाती है।
पर, लिखना जिसके बारे में उसे सोच तो धड़कन ही रूक जाती है।।

तू निर्जीव होकर भी , मेरा दर्द काग़ज़ पर उड़ेलती है।
जीवंत है जो, उसकी सोच भी न मुझ पर रुकती है।। 

तुझमें और उसमें ,शायद एक ही बात समान है।
तू भी है बहुत रंगों की, वो भी अनेक रूपों की दुकान है।।

                                                                                                                         
                                                                                                                                             DEEPSHREE

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