ख़ास ....❤️

    
                                                                           
ख़ास की एहमियत उससे ही जुड़ा जाने ।
जो जोड़े ,उसकी ख़ुशियों के ताने-बाने ।।

पल-पल जो उस ख़ास परछाई को ओढ़े।
दिल पर-भर को भी उससे नाता ना तोड़े।।

ख़ास की गलती भी ख़ास
गुनाह भी शायद उस ख़ास का ख़ास।।

ख़ास ही बदले शख़्सियत।
पा लेने पर शायद एहमियत।।

उम्मीदों को पूरा करने की उम्मीद उसी से ।
आकांक्षाओं को समझ ,फिर पा लेने की उम्मीद उसी से।।

बाँधकर भी शायद ,बाँधना ना चाहें।
पर दिशा हर एक उसकी अपनी ओर ही आए ,यह चाहें।।

अपने ख़ास से दूरी ।
 लगे ज़िंदगी की सबसे बड़ी मजबूरी।।

ख़ास  के लिए चाहें करना कुछ ख़ास
उसकी खुशी से जुड़ी है, ज़िंदगी की आस।।

अपना दर्द गवारा ,उसकी खुशी के आगे ।
पिरोना चाहे ,सिर्फ़ खुशी के मोती में धागे।।
                                                                                                                                   DEEPSHREE



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