दर्द इतना ही देना ख़ुदा.....









दर्द इतना ही देना ऐ ख़ुदा,
की उसकी मौजूदगी सारे राज़ न खोल दे।
कौन अपना ,कौन पराया , सारी बात मुँह पर ही न बोल दे ।।

 दर्द इतना ही देना ऐ ख़ुदा,
 की दिल में बनी उम्मीद चकनाचूर न हो ।
 मतलबी हो जाऊँ, यह सोचने पर दिल मजबूर न हो।

दर्द इतना ही देना ऐ ख़ुदा,
की जो अपने मे ही सीमट जाए।
न छलके आँखों से ,न शब्द ही  उसे कह पाएँ।।

 दर्द इतना ही देना ऐ ख़ुदा,
 जो अपने ख़ास को मुझसे जोड़ दे।
  झूठ का अस्तित्व मिटा, सच से नाता जोड़ दे ।
                                                                                                                DEEPSHREE

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