मेरा वजूद.....😘
मेरी माँ...
मधुर स्पर्श का वो पहला एहसास।
अपनी ओर खिंचती पालने की वह डोरी।
लाड़ के वो अनजाने चेहरे के भाव।
अपनेपन से भरी वह गोद।
सबसे सुन्दर होने का एहसास दर्शाती वो आँखें ।
अपने को भूल मुझ पर, ध्यान टिकाते वो सभी पल।
मुझे देख उन्हे अपने ,बचपन से मिलवाती वो शैतानी ।
मुझमे आने वाले हर बदलाव को सँजों कर रखने की चाहत।
हर पल दुआ में जुडे वो हाथ।
मेरे अस्तित्व को सवारने में किए गए छोटे-छोटे प्रयास ।
याद मुझे सिर्फ़ ,मेरी माँ की दिलाते हैं।❤️❤️
DEEPSHREE
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भाव के अनुरूप पढ़कर प्रोत्साहित करें l